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Sampúrn Kahániyan

Mercè Rodoreda

आया

 

 

 

 

 

... इधर मेरे पास आ, मुटकी गोल-गोल छिपकली! हंस! चल, हंस!... प्याली छी बुद्धु, छोटे-छोटे दांत दिखा... देखें? एक, दो, तीन... और आधा!, जो मसूढ़े के पीछे निकल रहा है। हाथ ऊपर कर, ऊप... जानती है मैडम लोग क्या कर रही हैं? हॉल में बैठी हैं और मिठाईयाँ खा रही हैं और सब मेरा पति, मेरा पति कह रही हैं... और तू और मैं मज़ा कर रहे हैं, पॉटी, पॉटी से भी बदतर। भरा पेट दिखा... छोटे कबूतर से, छुटके ख़रगोश से , तीतर से, चूज़े से, प्यारे कछुए से, छुटके ब्लैकबर्ड से, सबसे मोटा, गंदी पेशाब करती है... छोटे-छोटे हाथ ऊपर कर। मच्छर, मच्छर कह, मच्छर... हूउउउश! बगीचा देख। एक हाथ गरदन के पीछे कर, हाँ, ऐसे ही... देखा? रेशम का छोटा सा मफ़लर। देखती है कैसे हल्की बारिश हो रही है? चमकते हुये पेड़ को देख और वो पत्तियों जिनके बीच में से बूंदें ज़मीन की तरफ़ फिसल रही हैं, कीड़ों और झींगुरों को मोटा करने के लिये... सुना कैसे बिना रुके बोली जा रही हैं? मै-ड-मैं हैं... आदेलिना, बच्ची को ममा और पापा कहना सिखाओ। उसे अपने सामने बिठाओ और बहत आराम से, ताकि तुम्हें होंठ हिलाते देख पाए, उसे पा-पा बोलो, मा-मा बोलो... उन्हें इस तरह ही सिखाना पड़ता है, आराम से, छोटे बच्चे बहुत नकलची होते हैं... मेरे पति के संत त्यौहार पर बच्ची को पा-पा कहना आना चाहिए... पागल बोल! पा--, पा--... चिड़िया को देख, छुटकी ग्रीनफिंच को, छोटी सी ब्लैकबर्ड को देख कैसे तीन कीड़े अपनी चोंच में लिए भाग रही है... देख, देख... अब एक और मैडम आई है, देखा? नेउस लाल छतरी के साथ उसके लिये दरवाज़ खोलने जा रही है, और वे बात कर रहे हैं, और वो भी छोटी उंगली को हवा में उठाकर सुनहरी काँटों से क्रीम वाली मिठाई खाएगी, और मैं अभी जैस्मीन रंग वाला दूध बनाऊंगी। हम तो अकेले बहुत बढ़िया हैं न? छज्जे का दरवाज़ा खोलें?... एक मैडम की तरह संभलकर, हाँ, अपने छोटे-छोटे पैर यहाँ इकट्ठे पानी में रख। अच्छा लगा? ठंडा है, आसमान से आया है, इसे उस दाढ़ी वाले सज्जन ने भेजा है जो सबके ऊपर रहता है, जो बादलों की बनी पतलून व टोपी पहनता है और आमीन कहता है। अपने छुटंके हाथों से खेल... नहीं जानती? क्या यह सही नहीं है कि तू अब तक की बनाई गई सबसे प्यारी और सबसे छोटी लड़की है? नहीं क्या? तू मेरी है और हम एक-दूसरे को चाहते हैं न? अब तेरे पलंग पर। तेरे पैरों को उस तौलिए से पोंछूंगी, जिसका रंग मक्की के आटे सा है... अच्छी तरह से सुखा दूंगी। ताकि तुझे ज़ुकाम न हो, और नाक भी न बहे... हाथ में क्या है?... एक बाल? यह नहीं करना चाहिए, बुरी लड़की। किसी के बाल नहीं खींचने चाहियें। गंदे होते हैं, सुना? और तेरे हाथ हमेशा मूँगे जैसे होने चाहियें... शैतान! अगर भूत आएगा तो वह तुझे पूरा ही खा जाएगा: पहले एक उंगली, फिर दूसरी, फिर छोटे-छोटे पैर, घुटने... और छत वाली चिड़िया क जैसा पेट... हाँ मैडम, मुँह न बना। तुझे नाश्ते में खा लेगा और हड्डियाँ फेंक देगा ताकि बत्ती वाले कीड़े हंसे। जी मैडम। तो अच्छी तरह से रह। बोल... पा-पा, मा-मा... अब एक घुंघराले बालों वाली मैडम जिसने कमरपेटी लगाई हुई है जा ही है, और तू सबसे सुंदर है क्योंकि तेरे बाल गुसलख़ाने के झाड़ू की तरह बिखरे पड़े हैं। पागल, बोल! पा--, पा--... पापा के संत त्यौहार के लिए तुझे पागल बोलना आना चाहिये। छज्जे पर चलें, ठीक है? , ुझे चक्कर आ रहे हैं न? अब तो तुझ यह भी नहीं पता कि तेरा सिर कहाँ लगा है, है न? तेरे लिए एक जोकर की छोटी सी पोशाक बनाऊंगी और हम मेले में हंसने-खेलने, नाचने के लिए जाएँगे... जोकर की पोशाक पहनकर जाएगी...    

Mercè Rodoreda, Sampúrn Kahániyan. Nova Delhi: Yatra Books, 2010.
Translated by Sameer Rawal
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